शिक्षा के परिवेश में अभिभावक की भूमिका

Dr. Sushil PATEL Apr 05, 2026
शिक्षा के परिवेश में अभिभावक की भूमिका

शिक्षा केवल विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घर से शुरू होकर समाज तक पहुँचती है। इस पूरी प्रक्रिया में अभिभावक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वही बच्चे के प्रथम शिक्षक होते हैं।


आज आवश्यकता है कि अभिभावक केवल बच्चों को स्कूल भेजकर अपनी जिम्मेदारी पूरी न मानें, बल्कि उनकी शिक्षा में सक्रिय भागीदारी करें। बच्चों की पढ़ाई, व्यवहार और भविष्य के प्रति सजग रहना हर अभिभावक का कर्तव्य है।


दुर्भाग्यवश, वर्तमान समय में एक गंभीर समस्या देखने को मिल रही है। अधिकांश अभिभावक विद्यालय की फीस एवं अन्य देयों को समय पर जमा नहीं करते और बार-बार बच्चों का विद्यालय बदलते रहते हैं। वहीं दूसरी ओर, वे अन्य अनावश्यक व्यसनों और खर्चों पर पर्याप्त धन खर्च कर देते हैं।


यह प्रवृत्ति बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है।


बार-बार विद्यालय बदलने से बच्चे की पढ़ाई बाधित होती है, उसका आत्मविश्वास कमजोर होता है और वह मानसिक रूप से अस्थिर हो सकता है। हर नए वातावरण में ढलने में समय लगता है, जिससे उसकी शैक्षणिक प्रगति रुक जाती है।


इसी प्रकार, विद्यालय की फीस समय पर न जमा होने से बच्चे को कई बार शर्मिंदगी और असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जो उसके आत्मसम्मान और मनोबल को प्रभावित करता है।


अतः सभी अभिभावकों से निवेदन ही नहीं, बल्कि अपेक्षा है कि वे बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। विद्यालय के देयों को नियमित रूप से पूरा करें, ताकि बच्चों को एक स्थिर, सकारात्मक और सम्मानजनक वातावरण मिल सके।


याद रखिए—

व्यसन पर किया गया खर्च क्षणिक सुख देता है,

लेकिन शिक्षा पर किया गया निवेश जीवनभर का भविष्य संवार देता है।


जब अभिभावक, शिक्षक और विद्यालय मिलकर कार्य करते हैं, तभी एक सशक्त, शिक्षित और संस्कारित समाज का निर्माण होता है।

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Posted By: Dr. Sushil PATEL

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